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नमन हिन्दी को करता हूँ , कि यह भाषा हमारी है।

चरण हिन्दी की धरता हूँ ,कि यह भाषा हमारी है।

सुनो भारत के हर कोने से, यह आवाज आती है।

कि यह भाषा तुम्हारी है, कि यह भाषा हमारी है।।

जो इसमे कम उतरता है ,वो इसको कम समझता है ।

कोई बाधा समझता है , कोई उलझन समझता है ।

किनारे बैठ कर मोती , नहीं मिलते समझ लेना ।

जो इसमे डूब जाता है , वो इसका गुण समझता है ।।

मेरी हिन्दी से बेहतर , और भाषा हो नहीं सकती ।

ये प्यारी है हमे जितनी , विभाषा हो नहीं सकती ।

अरे इसको न तुम भूलो , जमाना तुम को भूलेगा ।

ये भारत भर की आशा है , निराशा हो नहीं सकती ।।

जो मेरे कंठ पर सजता , सुरीला राग है हिन्दी ।

जो तेरे दिल मे बजता है , मधुर वो साज है हिन्दी ।

कि जिसकी एक आहट पर , करोड़ो झूम जाते हैं ।

वो मिसरी घोलने वाली , मधुर आवाज है हिन्दी ।।

अगर माँ भारती के लाल हो ,सच्चे तो सुन लेना ।

अगर इस देश से तुम प्यार करते हो तो सुन लेना ।

अगर दुनिया मे भारत की , अलग पहचान रखना है ।

तो पूरी शान से हिन्दी को , अपनी शान चुन लेना ।।

सी. राम प्र. स्ना. शिक्षक (हिन्दी)

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